Short Motivational Story in hindi
Motivational Story of a woman में मैं आज आपको एक ऐसे सक्स की कहानी बताऊंगी वो covid के मरीजों के साथ रहती है। एक बार corona संक्रमण की शिकार भी हो चुकी है पर उनके हौसले ने उसे भी मात दे दी। और हैरानी को बात ये है बिना किसी दवा के ठीक हो गई और उन्हें फीवर भी नही आया।
आज जहां हर जगह corona पैर पसार रहा है और लोगो के दिलों में अपना डर का बसेरा बना रहा है वही दूसरी तरफ हेल्थ केयर वर्कर हमारे इस डर को कम करने और अपनी जिम्मेदारी उठाने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे। और हजारों हेल्थ केयर वर्कर में से एक है एआईआईएमएस (AIIMS) की नर्सिंग ऑफिसर मिनाक्षी गौर।
इन्होंने ना सिर्फ लाखो corona से पीड़ित मरीजों की मदद और देखभाल किया है बल्कि जब खुद बीमार पड़ी तो हिम्मत के साथ उसका सामना भी किया। सिर्फ डॉक्टर की सलाह मान कर आज बिना किसी दवाई के ठीक हो गई और हम सब के लिए एक इंस्पिरेशन भी बनी है।
वो अब बिल्कुल ठीक है और एक बार फिर अपनी ड्यूटी और अपने देश की रक्षा के लिए तैयार हो गई है। और वो बताती है है की उन्हें लक्षण भी सही से नही आए, ना ही बुखार।(सोच बदलने वाली कहानी)
उनसे जब इंटरव्यू में पूछा गया की कैसे बिना दवाई ले वो ठीक हो गई तो उन्होंने बताया की 9 जनवरी को जब उनके गले में हल्की खराश आई और बॉडी में हल्का दर्द महसूस हुआ तो उन्होंने अपना सैंपल जांच करवाने के लिए दे दिया। क्योंकि उस वक्त और सारे वर्कर पॉजिटिव आ रहे थे तो उन्हें ठीक लगा ये। और घर पर भी सबको बता दिया। ताकि उनका कमरा अलग कर दे।
और टेस्ट पॉजिटिव आने पर वो तुरंत ही 7 दिनों के लिए आइसोलेट हो गई। क्योंकि उनके घर में उनके भाई के बच्चे है। आइसोलेशन के दौरान उन्होंने अपना पूरा ध्यान रखा। डॉक्टर की कही हुई हर बात को उन्होंने अच्छे से फॉलो किया। (Motivational Story in Hindi)
हालांकि, covid का पहला और दूसरा wave आया पर किसी में भी नही हुआ। और ये तीसरा ओमिक्रोन वेरिएंट है जिसमे वो संक्रमित हो गई। लेकिन, वो घबराई नही जो अक्सर लोगो में देखा जाता है। वैसे मीनाक्षी गौर कहती है की उन्होंने covid वैक्सीन के दोनो डोज को नियमित समय पर ले लिया था।
अगर खाने पीने और प्रिकॉशन की बात की जाए तो उन्होंने टाइम पर खाना खाया, और सारी सावधानियां बरती जो उनके घर में संक्रमण को बढ़ने से रोका। पैरासिटामोल भी उन्हें लेने के जरूरत नही पड़ी। बस कभी कभी गरारा, और भाप लेती रहती। और ऐसा सिर्फ दो दिनों तक ही करना पड़ा, तीसरे दिन से उन्हें कोई और लक्षण का इशारा नही मिला।
खाने की बात करे तो ज्यादातर वो तरल चीज लेती। ताकि बॉडी में पानी की कमी न हो। मौसमी फल और सब्जियां ली। अच्छी और स्वस्थ डायट का पालन किया।
मीनाक्षी कहती है की ओमिक्रॉन बहुत ज्यादा जानलेवा नही है और न ही ज्यादा टेंशन या स्ट्रेस लेने वाली बात है। पर संक्रमण बहुत जल्दी फैलता है जिससे एक स्ट्रेस का माहौल बना हुआ है।
अगर आप भी ओमिक्रॉन से संक्रमित होते है तो घबराए नहीं। डॉक्टर की सलाह से ही दवाई ले। और सावधानियों को नजर में रखे ताकि और न हो। अच्छा आराम करे। अगर आपको कोई भी ऐसी सिंपटॉम्स दिखे तो समय पर जांच कराए और आइसोलेट हो जाए।
वाकई मीनाक्षी गौर की कहानी मोटिवेशनल तो है और इंस्पायरिंग भी। आपको ये short motivational Story in Hindi for success कैसी लगी। हमे comment करके जरूर बताएं। और अगर आप भी इंस्पायर होते है इसे share करके अपने दोस्तो को भी मोटिवेट कीजिए।
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